जब तक बच्चों को अपना नहीं मानेंगे, जिले से कुपोषण कैसे भागेंगे तारन प्रकाश सिन्हा

जब तक बच्चों को अपना नहीं मानेंगे, जिले से कुपोषण कैसे भागेंगे तारन प्रकाश सिन्हा

जिले से कुपोषण हटाने और एनीमिक महिलाओं को स्वस्थ बनाने शुरू हुआ अभियान

कलेक्टर ने स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग की बैठक लेकर दिए निर्देश

जांजगीर-चाम्पा कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा ने आज स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्याे की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज के बच्चे, कल के भविष्य है। ये बच्चे बड़े होंगे, देश के नागरिक बनेंगे। यदि यह कुपोषित होंगे तो उनका जीवन यापन कितना कठिन होगा। असामयिक बीमारी और मृत्यु की संभावना बनी रहेगी। हमें नहीं भूलना चाहिए कि हम जिस विभाग में आए हैं, उस विभाग में रहकर हमें क्या करना है ? हमारी जिम्मेदारी और कर्तव्य क्या है? हमें काम के बदले वेतन मिलते हैं। हम अपना दायित्व क्यों भूल गए हैं ? हमें और भी आगे आकर काम करना होगा। जब तक हम इन कुपोषित बच्चों को अपना या परिवार का बच्चा मानकर इनका मेडिकल जाँच नहीं करेंगे, इन्हें पोषण आहार नहीं खिलाएंगे तो जिले से कुपोषण कैसे दूर होगा? आप सभी सक्रिय हो जाइए, आज से लगातार 15 दिन तक अभियान चलाकर जिले से कुपोषण को दूर करने अभियान चलाइये। न सिर्फ कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाना है। गर्भवती और एनीमिक महिलाओं को भी स्वस्थ बनाना है। यह सरकारी काम के साथ एक सेवा का भी काम है, इससे आपकों संतुष्टि के साथ पुण्य भी मिलेगा। इसके लिए पैसे की कोई कमी नहीं है। आप बस ईमानदारी से काम करिए। स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर सिन्हा ने कहा कि इस कृषि प्रधान जिले में गंभीर कुपोषित बच्चों और एनीमिक महिलाओं का होना बहुत ही चिंता का विषय है। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के माध्यम से कुपोषण हटाने के लिए अभियान चलाने के साथ बच्चों और महिलाओं के नियमति स्वास्थ्य जांच के निर्देश देते आए हैं। जिले में इस अभियान को सफल बनाने की जिम्मेदारी हमारी है। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि 15 अगस्त तक लगातार घर-घर जाकर, आसपास शिविर लगाकर कुपोषित बच्चों और एनीमिक तथा गर्भवती महिलाओं को स्वस्थ बनाना है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास संयुक्त रूप से अभियान चलाए और बच्चों तथा महिलाओं का स्वास्थ्य कार्ड बनाकर प्रत्येक 15 दिन में जांच भी करें। उन्होंने कहा कि जिले से कुपोषण को दूर करने के साथ पोषण पुनर्वास केंद्रों और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है। कलेक्टर ने पोषण पुनर्वास केंद्रों की सुविधाओं को बढ़ाने तथा कुपोषित बच्चों को यहां लाकर पोषण आहार देकर उपचार के निर्देश दिए। कलेक्टर ने इस कार्य में ईमानदारी दिखाने के निर्देश देते हुए कहा कि अभी वजन त्यौहार भी चल रहा है। क्षेत्र के विधायक, जनपद अध्यक्ष, सदस्यों, पंच, सरपंचों के अलावा अन्य जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित करें और उनका सहयोग लेकर कुपोषण के खिलाफ शुरू किए जा रहे अभियान को सफल बनाए। यह कोई बहुत कठिन कार्य नहीं है। समर्पण और सेवा के साथ कार्य करेंगे तो कुछ दिन में ही जिले से कुपोषण दूर भाग जाएगा। बैठक में जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. फरिहा आलम सिद्धिकी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर के सिंह, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी, सिविल सर्जन डॉ अनिल जगत, बीएमओं, परियोजना अधिकारी, पर्यवेक्षक आदि उपस्थित थे।


आंगनबाड़ी केंद्रों में गरम भोजन, अण्डा, केला देना प्रारंभ करें
कलेक्टर श्री सिन्हा ने जिले में सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में गरम भोजन देने के निर्देश दिए। उन्होंने गंभीर कुपोषित बच्चों और महिलाओं को विशेष रूप से अतिरिक्त पोषण आहार देने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित किया कि गर्भवती और एनीमिक महिलाओं को गरम भोजन के साथ अण्डा या केला दें। कलेक्टर ने महिलास एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों, पर्यवेक्षकों को निर्देशित किया कि आंगनबाड़ी का संचालन समय पर हो। कार्यकर्ता, सहायिका गृह भेंट नियमित करें और बच्चों के साथ अपने आसपास की महिलाओं के संबंध में पूरी जानकारी रखते हुए शासन की योजनाओं का लाभ दिलाए।

कुपोषण के साथ बच्चों में अन्य बीमारियों की भी करें जांच
कलेक्टर सिन्हा ने सभी बीएमओं को निर्देशित किया कि कुपोषित बच्चों का हर 15 दिन में स्वास्थ्य जांच करने के साथ ही उनमें किसी प्रकार की बीमारी की भी जांच करें। बीमारी की स्थिति में उनका बेहतर उपचार के लिए आवश्यक प्रबंध किया जाएगा। जिला, राज्य स्तर के अस्पतालों में उपचार कर स्वस्थ बनाया जाएगा। कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देशित किया कि शासन की योजनाओं का लाभ गरीब वर्गों को मिलना चाहिए। उन्होंने डॉक्टरों को जेनरिक दवाइयां अपने प्रिस्क्रिप्शन में लिखने और धनवंतरी मेडिकल दुकानों से दवाइयां खरीदने मरीजों को प्रोत्याहित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने एएनएम द्वारा किए जा रहे स्वास्थ्य जांच की प्रतिशत कम होने, बच्चों का टीकाकरण कम होने और संस्थागत प्रसव की संख्या कम होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सभी बीएमओं को इसमें सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होंने डाक्टरों को समय पर अस्पताल पहुचने तथा मितानिनों के सहयोग से संस्थागत प्रसव को बढ़ाने, बीमारी के रोकथाम करने के संबंध में भी निर्देश दिए।

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