जिले में नरवा, गरवा, घुरूवा और बाड़ी योजना का हो रहा बेहतर क्रियान्वयन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूूती

 

जिले में नरवा, गरवा, घुरूवा और बाड़ी योजना का हो रहा बेहतर क्रियान्वयन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूूती

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गौठानों में गोबर खरीदी और आजीविका गतिविधियों से ग्रामीणों, युवाओं, और महिलाओं को मिल रहा स्वरोजगार

जांजगीर चांपा।  10 नवम्बर 2022/ छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरूवा और बाड़ी योजना के जिले में बेहतर क्रियान्वयन से जिले के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के मंशानुरूप गोधन न्याय योजना के माध्यम से जिले के गौठानों में गायो के लिए शेड, पानी की व्यवस्था सुनिश्चित हुई है वहीं दूसरी ओर महिला स्वसहायता समूहों, युवाओं और ग्रामीणों को स्वरोजगार भी मिल रहा है। इस योजना के माध्यम से पशुपालकों को गोबर बेचने से अमदनी होने के साथ ही गौठानों में गोबर से वर्मी खाद तथा गौमूत्र से ब्रम्हास्त्र और जीवामृत जैसे जैविक उत्पाद बनाकर जिले में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। कलेक्टर श्री तारन प्रकाश सिन्हा एवं जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. ज्योति पटेल के मार्गदर्शन में जिले में गोधन न्याय योजना और गोठानों का सफलता पूर्वक संचालन एवं क्रियान्यवान किया जा रहा है। जांजगीर-चांपा जिले में गोठानों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, मछली पालन विभाग, उद्यानिक विभाग के अलावा क्रेडा के माध्यम से गौठानों में विभिन्न गतिविधियों का सुचारू रूप से क्रियान्वयन किया जा रहा है। जिले में ग्रामीण एवं शहरी 321 और 11 आवर्ती चराई सहित कुल 332 गोठानों की स्वीकृति दी गई है। इनमें से ग्रामीण, शहरी एवं आवर्ती कुल 251 गोठानों को पूर्ण किया गया। जिसमे से गोधन न्याय योजना में 231 गोठानों का सुचारू रूप से संचालन करते हुए गोबर की खरीदी की जा रही है।

जिले के गौठानों में गोबर की नियमित हो रही खरीदी

गोधन न्याय योजना का शुभारंभ प्रदेश सहित जिले में 20 जुलाई 2020 से हुआ। इसके बाद से ही जिले के गौठानों में गोबर की खरीदी नियमित रूप से की जा रही है। गोठानों में गोबर बेचने से पशुपालक की आमदनी बढ़ी है। जिले में कई ऐसे गोबर विक्रेता पशुपालक हैं, जिन्होंने सैकड़ों क्विंटल गोबर को गोठानों में बेचा है। जिले में सक्रिय गोबर विक्रताओं के माध्यम से 231 गोठानों में 2 लाख 39 हजार 728 क्विंटल गोबर बेचा गया जिससे हितग्राहियों को 408.985 लाख रुपए उनके खातों में भेजे गए हैं।

पशुओं के लिए की जा रही है चारे की उचित व्यवस्था

गायों को नियमित रूप से चारा की व्यवस्था हो, किसी तरह की कोई कमी न आए इसके लिए 223 चारागाह के निर्माण को लेकर स्वीकृति दी गई। जिसमें से 194 चारागाह का निर्माण कर 133 चारागाह में नेपियार, मक्का आदि घास की बुआई की गई है। इसके साथ ही कलेक्टर द्वारा जिले के किसानों को पैरादान के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

किसानों को मिल रही जैविक खाद, जांजगीर-चांपा जिला गोमूत्र खरीदी में प्रथम

जांजगीर-चांपा जिला में महिला स्व सहायता समूहों के माध्यम से गोबर से जैविक खाद तैयार की जा रही है। जैविक खाद का निर्माण सतत रूप से किया जा रहा है। गोठान में क्रय किये गये गोबर से अब तक 63 हजार 315 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन हुआ, जिसमें से 53 हजार 673 क्विंटल विक्रय किसानों एवं बाड़ी विकास से जुड़े किसानों को किया गया है। तिलई एवं खोखरा गोठान में गोमूत्र की खरीदी के बाद ब्रम्हास्त्र एवं जीवामृत तैयार कर किसान खेती में उपयोग कर रहे हैं। जिसके डालने के बाद फसल को फायदा पहुंच रहा है। रसायनिक खाद के इस्तेमाल को किसान धीरे-धीरे कम करने लगे हैं। जिससे आने वाले समय में लोगों को रसायनिक खाद के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलेगी। जांजगीर-चांपा जिला तिलई गोठान एवं खोखरा गोठान में 9 हजार 2 सौ 28 लीटर गौमूत्र खरीदी के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर है।

जिले में रीपा योजना से ग्रामीणों, महिलाओं एवं युवाओं को मिलेगा रोजगार

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा 2 अक्टूबर 2022 को ग्रामीण औद्योगिक पार्क का उद्घाटन, शिलान्यास एवं भूमिपूजन किया गया। इसके माध्यम से ग्रामीणों, महिलाओं एवं गांव के युवाओं को बेहतर रोजगार के साधन उपलब्ध होंगे। रीपा योजना के तहत से जिले के इच्छुक ग्रामीणों, युवाओं और महिलाओं को बेहतर प्रशिक्षण देकर उद्यमी बनाया जाएगा। जांजगीर-चांपा की 5 जनपद पंचायतों के 10 गोठानों में रीपा योजना का शुभारंभ किया गया है। इन गोठानों में रीपा के तहत बड़ी, पापड़ के निर्माण से लेकर बेकरी, आफसेट प्रिंटिंग, मशरूम उत्पादन, अगरबत्ती, कोसा उत्पादन आदि क्षेत्रों में कार्य किया जाएगा। इसके पहले ही जिले के गोठानों में आजीविका गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। गोठान में 161 बाड़ी विकास, 90 मशरूम उत्पादन, 107 मछली पालन, 47 मुर्गीपालन, 10 बकरी पालन एवं अन्य गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

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