महिलाओं के विरूद्ध होने वाली हिंसा की रोकथाम हेतु कार्यशाला का आयोजन

 

महिलाओं के विरूद्ध होने वाली हिंसा की रोकथाम हेतु कार्यशाला का आयोजन

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जांजगीर-चांपा 15 दिसम्बर 2022/ महिलाओं के विरूद्ध होने वाली हिंसा के रोकथाम हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यालय सखी वन स्टॉप सेंटर, महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला-जांजगीर-चाम्पा (छ.ग.) द्वारा जिला पंचायत जांजगीर के सभाकक्ष में जिला स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य के बारे में जानकारी देते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी अनिता अग्रवाल द्वारा बताया गया कि विभिन्न विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ उक्त संबंध में कार्यशाला का आयोजन इसलिए किया गया कि वे अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों तथा अपने क्षेत्र विशेष पर जागरूकता ला सके। जिससे महिलों के प्रति हो रही हिंसा का रोकथाम किया जा सके और महिलाएं सम्मान के साथ विभिन्न क्षेत्रों में स्वयं को स्थापित कर सके।
सखी के केन्द्र प्रशासक  एच. निशा खान द्वारा कार्यशाला का आरंभ करते हुए मुख्य रूप से महिलाओं के विरूद्ध होने वाली हिंसा, हिंसा की प्रकृति, महिलाओं के साथ होने वाले अपराध, महिलाओं को संविधान प्रदत्त कानूनी अधिकार, भारत शासन द्वारा महिला हिंसा रोकथाम हेतु तथा महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने हेतु की गयी पहल पर चर्चा की गयी। इसके अतिरिक्त महिला संरक्षण अधिकारी नवाबिहान द्वारा घरेलू हिंसा, लैंगिक उत्पीड़न, महिलाओं के कार्यस्थल पर होने वाली हिंसा एवं उसके निवारण हेतु गठित समिति एवं समिति द्वारा 90 दिवस के भीतर प्रकरण का निराकरण करने अथवा समयावधि में निराकरण न होने पर अधिकारी को होने वाली सजा तथा जुर्माना के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गयी। विधिक सेवा प्राधिकरण से सचिव गितेश कौशिक  द्वारा महिलाओं को प्राप्त विधिक अधिकारों एवं आर्थिक तंगी के कारण महिलाओं को सरकार द्वारा निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने के अधिकार के संबंध में जानकारी प्रदान किया साथ ही उन्होनें यह भी बताया कि भरण-पोषण राशि तथा लिव इन रिलेशनशीप के संबंध में अहम जानकारी देते हुए बताया कि यदि महिला किसी पुरूष से यह जानते-समझते हुए रिश्ते मे आती है कि वह शादीशुदा है तो ऐसी महिला भरण-पोषण की अधिकारी नही होगी। जिला स्तरीय स्थानीय शिकायत समिति की अध्यक्ष  तान्या अनुरागी प्रचीनकाल से वर्तमान तक महिलाओं की स्थिति के विषय पर प्रकाश डाला। छ.ग. महिला आयोग की सदस्य  शशीकांता राठौर द्वारा उक्त संबंध में उल्लेख करते हुए बताया कि अधिकतर महिलाओ को अपने अधिकारो की जानकारी नही होने के कारण पूरी जिंदगी स्वयं के लिए आवाज नही उठा पाती और हिंसा सहने पर मजबूर हो जाती है। उनकी बेटियां भी यही देखती, सीखती और सहती चली आती है। इस तरह के कार्यशाला के आयोजन से लोगों में जागरूकता लायी जा सकती है और महिला को हिंसा होने से बचाने के साथ सम्मान की जिंदगी जीने का अधिकार दिलाया जा सकता है। साथ ही उन्होने यह भी कहा कि विभिन्न समस्त सरकारी एजेंसियों को भी महिला मुद्दों के प्रति गंभीर और संवेदनशील होते हुए कार्य करने की आवश्यकता है। तभी महिलाओं के लिए हिंसा मुक्त समाज की स्थापना की जा सकेगी। डॉ. ज्योति पटेल मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत द्वारा महिला हिंसा के संबंध में बताया गया कि यदि आपके आसपास या आपकी जानकारी में कोई महिला प्रताड़ित हो रही है तो आप अपनी पहचान छुपाते हुए शिकायत दर्ज करवा सकती है। महिलाओं को अपने ऊपर हो रहे हिंसा की लडाई को अंत तक धीरज के साथ लडना होगा तभी महिला को न्याय मिल सकता है। उनके द्वारा यह कहा गया कि यदि कोई पीड़िता आती है तो उसकी सहायता/उपचार तुरंत करें ताकि भविष्य में इस घटना का उसके जीवन पर मनोवैज्ञानिक विपरीत प्रभाव न पड़े। कार्यक्रम में जिले के अनेक विभागों से जिला स्तरीय अधिकारी, विभाग से परियोजना अधिकारी एवं सुपरवाइजऱ तथा सखी टीम उपस्थित थे।

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