कृषि विभाग के साथ मिलकर परम कुर्रे बने उन्नतशील किसान आपदा को अवसर में बदला और थामी किसानी की राह

कृषि विभाग के साथ मिलकर परम कुर्रे बने उन्नतशील किसान आपदा को अवसर में बदला और थामी किसानी की राह

 

 

जांजगीर-चांपा 06 मार्च 2024/ कोरोना काल की महामारी के बीच जब लोगो की नौकरियां जा रही थी तब परम कुर्रे ने खेती किसानी का दामन थामा। उन्होंने कृषि विभाग की केन्द्र एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं का लाभ लेकर न केवल पामगढ़ बल्कि जिले के आस पास क्षेत्र में उन्नतशील किसान के रूप में पहचान बनाई। 11 एकड़ की जमीन पर वह विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन करते हुए अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने कृषि के साथ ही उद्यानिकी, पशुपालन एवं मछली पालन के क्षेत्र में हाथ अजमाए और इसमें भी वह सफल हुए।
जांजगीर-चांपा जिले के विकासखंड पामगढ़ के अंतर्गत ग्राम पंचायत राहौद के रहने वाले उच्चशिक्षित परम कुमार कुर्रे जिन्हें उन्नतशील किसान के रूप में पहचना जाता है। लेकिन आज से चार साल पहले उन्हें कोई नही जानता था। वह शिक्षकीय कार्य में प्राइवेट सेवा देकर अपनी जिन्दगी की गाड़ी को आगे बढ़ा रहे थे कि इसी दौरान कोरोना काल जैसा समय आया जब उन जैसे कार्य करने वालों को घर पर बैठना पड़ा। यही वह समय था जब उनके जीवन में नया बदलाव आया। उन्होंने अपने परिवार के साथ मिलकर गांव में खेती हर जमीन को अच्छी पैदावार के लिए तैयार किया और जांजगीर सहित रायपुर के कृषि विज्ञान केन्द्र के माध्यम से प्रशिक्षण लेकर बेहतर कार्य करने की कृषि प्रणाली को सीखा। यह प्रशिक्षण परम कुर्रे के लिए बहुत कारगर सिद्ध हुआ। परम कुर्रे बताते है कि कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मछलीपालन के कार्यों से जुड़कर वह अच्छी खासी आमदनी अर्जित कर रहें हैं। लगभग उन्हें 10 से 12 लाख रूपए की आमदनी हो रही है और वह गांव के उन्नतशील किसान बनकर उभरे हैं।
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एनके दिनकर ने बताया कि ग्राम राहौद के कृषक परम कुमर कुर्रे को आत्मा योजनांतर्गत कृषि विभाग से समन्वित कृषि प्रणाली विषय पर प्रशिक्षण दिया गया तथा कृषि भूमि समन्वित कृषि प्रणाली अपनाकर खेती प्रारंभ कराया गया। जिसमें 2.5 हेक्टर भूमि पर कृषि संबंधी गतिविधियां खरीफ में धान, रबी में चना, मटर एवं सरसों फसल की खेती की करतेह हुए लागत घटाकर 4 से 5 लाख रू. का लाभ प्राप्त किया। इसी प्रकार 1.5 हे. भूमि में उद्यानिकी की फसल जैसे टमाटर, भिंडी, ,बैगन, करेला एवं खीरा फसलों की खेती से औसतन लागत घटाकर 3.5 से 4.0 लाख रू. का लाभ हो जाता है, घर मंे 10 शाहीवाल नस्ल के गाय है जिससे औसतन 15 से 20 लीटर दूध सालभर मिलता है उससे भी 1 लाख रू. तक लाभ हो जाता है मेरे पास खुद का छोटा तालाब में 0.25 हे. में रोहू कतला मछली का पालनकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।

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