सरकार के उद्देश्यों के अनुरूप गौठानों का हो संचालन तारन प्रकाश सिन्हा
कलेक्टर ने गोधन न्याय योजना के कार्यों की समीक्षा की
आजीविका के प्रमुख साधन के रूप में विकसित करने के दिए निर्देश


सरकार के उद्देश्यों के अनुरूप गौठानों का हो संचालन तारन प्रकाश सिन्हा

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कलेक्टर ने गोधन न्याय योजना के कार्यों की समीक्षा की
आजीविका के प्रमुख साधन के रूप में विकसित करने के दिए निर्देश


जांजगीर चांपा । 12 जुलाई 2022/ कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा ने आज गोधन न्याय योजना अंतर्गत संचालित गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने इस योजना को राज्य सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना बताते हुए कहा कि जो भी गौठान है, वह सक्रिय होनी चाहिए। गौठानों में गायें नियमित आनी चाहिए। गोबर खरीदी नियमित होने के साथ वर्मी खाद बने और बिक्री भी होनी चाहिए। गौठानों में मछली, मुर्गी पालन के अलावा आजीविका के साधन विकसित हो। गौठानों में मवेशी रखने और स्व-सहायता समूह के कार्यों का अलग-अलग क्षेत्र होना चाहिए। कलेक्टर ने कहा कि गोधन न्याय योजना माननीय मुख्यमंत्री जी की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली योजना है, जांजगीर-चांपा कृषि प्रधान जिला है। यहां के लोग जागरूक और मेहनती है। हम सभी मिलकर जिले में आदर्श गौठान बना सके, इस दिशा में कार्य किया जायेगा।
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में गोधन न्याय योजना की समीक्षा करते हुए कलेक्टर सिन्हा ने कहा कि गौठानों में आय के प्रमुख गतिविधियों को संचालित किया जाए। रोका-छेका अभियान 10 से 20 जुलाई तक संचालित किया जाए। पशुधन विकास विभाग शेड्यूल बनाकर पशुओं के बधियाकरण, टीकाकरण के कार्यक्रम जारी करें। गौठानों की स्थिति मेें सुधार के लिए बेहतर प्रस्ताव तैयार करें। एसडीएम, तहसीलदार, जनपद सीईओ, सीएमओं और विभागीय अधिकारी इस महत्वकांक्षी योजना को मौके पर जाकर देखे। कलेक्टर सिन्हा ने जिले में निर्मित सभी गौठानों की जनपद और ब्लॉकवार समीक्षा की। उन्होंने गौठानों में गोबर खरीदी को बढ़ाने और वर्मी खाद बनाने के साथ इसकी बिक्री के भी निर्देश दिए। कलेक्टर ने गौठानों की गतिविधियों को पोर्टल में एन्ट्री करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने शेडयुक्त गौठानों में मिनी राइस मिल, हैण्डलूम, मसाला निर्माण, कोसा धागाकरण जैसे कार्यों सहित अन्य गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने गौठानों में 10 दिन के भीतर विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने, हरेली त्यौहार से पूर्व नये निर्मित गौठानों में भी गोबर खरीदी प्रारंभ कराने, वर्मी टांका का निर्माण कराने, चारागाह लगाने, निर्मित वर्मी खाद का वितरण कराने के लिए भी निर्देशित किया। बैठक में जिला पंत्रायत सीईओ फरिहा आलम सिद्धकी, डीएफओ सौरभ सिंह ठाकुर, एसडीएम जांजगीर कमलेश नंदिनी साहू समेत विभागीय नोडल अधिकरी और वीडियो कान्फ्रेंिसग के माध्यम से सभी एसडीएम, जनपद सीईओ, तहसीलदार, जनपद स्तर के अधिकारी उपस्थित थे।

सब्जी, फल-फूल उत्पादन का बढ़ावा दें
कलेक्टर ने गौठानों में फलदार और लाभदायक पौधे लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने गौठानों की भूमि में फूलों की खेती, पपीता, शहतूत, हल्दी, जिमीकंद, मेथी, भाजी लगाने, बकरी, मुर्गी, मछली पालन करने, मशरूम उत्पादन, डेयरी संचालन करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने स्व-सहायता समूहों को स्व-रोजगार के साथ आत्मनिर्भर बनाने के निर्देश देते हुए समूहों द्वारा उत्पादित सामग्रियों को स्कूल, आश्रम, छात्रावास, आंगनबाड़ी, अस्पताल आदि में क्रय करने के निर्देश दिए।

गोबर विक्रेताओं की संख्या बढ़ाए
कलेक्टर ने जिले में पंजीकृत गोबर विक्रेताओं की संख्या की तुलना में गोबर बेचने वालों की संख्या कम होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ सभी पात्र लोगों को अवश्य मिले। उन्होंने जनपद सीईओं सहित नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन्होंने गोबर बेचने के लिए पंजीकरण कराया है, वे गोबर बेचे, इसके लिए विक्रेताओं को प्रेरित करे। सभी गौठानों में गोबर खरीदी नियमित होनी चाहिए और खाद का निर्माण भी किया जाना चाहिए।

गोधन न्याय योजना के लिए पैसे की कोई कमी नहीं
कलेक्टर ने बैठक में सभी अधिकारियों को इस योजना के मूल उद्देश्यों को विस्तार से समझाते हुए बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री इस योजना को विशेष फोकस किए हुए हैं। वे प्रत्येक ग्रामीण क्षेत्रों में गौठान को ग्रामीण औद्योगिक पार्क के रूप में स्थापित कर आजीविका के केन्द्र के रूप में विकसित करना चाहते हैं। यह ग्रामीणों की संस्कृति से जुड़ा होने के साथ आर्थिक स्वावलंबन का महत्वपूर्ण आधार भी है। गोधन न्याय योजना का जिले में सही संचालन होना चाहिए। हमारे जिले में आर्दर्श गौठान निर्मित होने के साथ आजीविका की गतिविधियां भी संचालित हो, इसके लिए पैसे की कोई कमी नहीं है। राशि देने के बाद कार्य भी दिखना चाहिए। मैं स्वयं एक-एक रूपए का हिसाब लूंगा, इसलिए इस कार्य को ईमानदारी और प्राथमिकता से करें। यदि इस कार्य को करने में अधिकारी रुचि नहीं लेंगे तो उनका वेतन रोकने के साथ सीआर भी कार्यों के हिसाब से अंकित किया जाएगा।

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